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Aligarh News: इगलास का मराठा क़िला, जो आज गुमनामी में जीने को मजबूर है…

Aligarh News: एक ज़माना था जब इगलास के मराठा को देखने दूर दूर से लोग देखने आया करते थे। ये क़िला एतिहासिक धरोहर में शामिल हुआ करता था। लेकिन आज ये अपने संरक्षण के लिए तड़प रहा है।

वर्षों पहले इगलास कस्बे के पूर्व दिशा में गांव असाबर व पश्चिम में गांव गंगापुर हुआ करता था। दोनों गांवों के मध्य मराठो में से ग्वालियर के संस्थापक महादाजी सिंधिया ने 1762 ई. के आसपास ऊचे टीले पर किले का निर्माण किया था।

किले में मराठे दरबार लगाकर न्याय करते थे। फारसी भाषा होने के कारण दरबार को इज्लास (अदालत) कहा जाता था। लगभग 1802 ई. से अंग्रेजो ने यहां राज्य किया। Aligarh News

स्वतंत्रता के साथ गंगापुर गांव का अस्तित्व खत्म हो गया। दोनों गांवों के मध्य बसावट होती चली गई और एक कस्बा बन गया। इस कस्बे का नाम इज्लास से बिगड़ कर इगलास पड़ गया।

गांव असाबर आज भी एक मुहल्ले के रुप में अस्तित्व में है। स्वतंत्रता के बाद किले में तहसील की स्थापना हुई। नई इमारत बनने के बाद तहसील स्थानांतरित हो गई। सन्1991 के लगभग राजकीय कन्या हाईस्कूल की स्थापना कर दी गई। कुछ वर्ष पहले कॉलेज भी नए भवन में स्थानांतरित हो गया।

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aligarh qila courtesy JN News

किले पर 1857 में हुई थी जंग

Aligarh News: 1857 ई. में जब चारों ओर क्रांति की भावना फैल गई तो इगलास क्षेत्र भी उससे अछूता नहीं रहा था। यहां के क्रांतिकारियों ने गांव गहलऊ के क्रांतिकारी अमानी सिंह के नेतृत्व में स्वतंत्रता का बिगुल फूंक दिया।

अमानी सिंह ने किले पर चढ़ाई कर दी। क्रांतिकारियों के भय से अंग्रेज किले को छोड़ कर भाग गए। अंग्रेज तहसीलदार ने जान बचाकर मुरसान में शरण ली। क्रांतिकारियों ने किले का खजाना लूट लिया। अमानी सिंह ने इगलास क्षेत्र को स्वतंत्र घोषित कर दिया। इसके बाद मेजर बर्लटन अपने सैनिकों व तोपों के साथ यहां पहुंच गया।

Aligarh Qila Courtesy JN News

वीर स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों ने शौर्य के साथ उसका सामना किया लेकिन दुर्भाग्य से उसी समय बारिश होने पर पलीते भीग जाने के कारण उनकी बंदूकें अंग्रेजों का सामना करने में असमर्थ हुई।

घोर संग्राम का परिणाम यह हुआ कि बर्लटन के सैनिकों ने पुन: किले को अपने संरक्षण में ले लिया। लेकिन क्रांतिकारियों की स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रही और उन्होंने खैर में हुए संग्राम में भी प्रमुख भूमिका निभाई।

अंग्रेजों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमानी सिंह को विद्रोही घौषित कर दिया। अंत में अंग्रेजों ने अमानी सिंह को पकड़ कर फांसी पर चढ़ा दिया। वीर अमानी सिंह से संबंधित लोकगीत ‘अमानी मानै तो मानै अमानी की घोड़ी न मानै’ और ‘महुऔ मारि बीठना मारयौ, कोल के लग गये तारे, शाबास गहलऊ वारे’ आज भी प्रसिद्ध हैं।

किले का अस्तित्व खतरे में

जिस से कस्बा इगलास को नाम मिला, अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले कांतिकारियों की युद्ध की गाथा व गुलामी की यादों को ताज करने वाला किला जमीदोज होने के कगार पर है।

रखरखाब के अभाव में किले के बुर्जो में दरार पड़ गई है। दीवारे चटक गई है। ऐतिहासिक धरोहर को पुरातत्व इमारत या पर्यटन स्थल घोषित नहीं किया गया। इस और न तो शासन का ध्यान है न समाज का।

देखरेख के अभाव में किला खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। किले के चारों ओर गंदगी का सामराज्य है। ऐसी अव्यवस्था में वह दिन दूर नहीं जब इस धरोहर का नाम निशान ही मिट जायेगा।

तत्कालीन एसडीएम ललित कुमार ने किले को संरक्षण हेतु पुरातत्व विभाग को दिए जाने के लिए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी थी। लेकिन रिपोर्ट सिर्फ फाइलों में दबकर रह गई।

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