Shamshad Market
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पुस्तकों का हब बन चुका है Shamshad Market, हजारों विद्यार्थी यहाँ से खरीदते हैं पुस्तकें

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में स्थित Shamshad Market काफी मशहूर है। आपको प्रवेश परीक्षा या किसी कोर्स की, या फिर धार्मिक पुस्तक चाहिए तो शमशाद मार्केट का चक्कर ज़रूर लेना चाहिए।

जो पुस्तक किसी अन्य बाजार में नहीं मिलती, वो यहां मिल जाती है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से सटा यह शमशाद मार्केट पुस्तकों का हब बन चुका है।

कभी यहां दर्जी की दुकानें हुआ करती थीं, कुछ एक होटल भी थे। अब पुस्तकों की दुकानें एक कतार में नजर आती हैं। इस मार्केट को स्थापित करने का श्रेय एएमयू को जाता है।

यहां पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थी यहीं से पुस्तकें व स्टेशनरी का बाकी का सामान लेते हैं। हर कोर्स की पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं। यही नहीं, चाय चुस्कियां भी यहां की काफी चर्चित हैं।

जगह-जगह चाय के होटल मिल जाएंगे। छात्रों का जमावड़ा दिनभर लगा रहता है। एएमयू से पढ़कर बड़े-बड़े ओहदों पर पहुंचे छात्र शमशाद मार्केट को भूल नहीं पाएंगे।

एएमयू के विकास के साथ मार्केट भी हुआ विकसित

पुस्तकों के हब के रूप में शमशाद मार्केट का उदय एएमयू के साथ ही हुआ। जब एएमयू की स्थापना नहीं हुई थी, तब शमशाद मार्केट ऐसा नहीं था, जैसा अब है।

फौजी छावनी से सटा यह आम मार्ग था, जो अनूपशहर की ओर जाता था। बताते हैं कि 1877 में फौजी छावनी की 74 एकड़ जमीन पर सरसैयद अहमद खां ने मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल (एमएओ) कॉलेज की स्थापना की थी।

काफी संघर्ष के बाद इस कॉलेज ने अलीगढ़ मुस्लिम (एएमयू) विश्वविद्यालय का रूप लिया। 17 दिसंबर 1920 को विश्वविद्यालय का विविधत उद्घाटन हुआ था।

इससे पहले शमशाद मार्केट में दर्जी की दुकानें, चाय के होटल हुआ करते थे। कुछ एक दुकानें धार्मिक पुस्तकों की भी थीं। लेकिन, विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद पुस्तकों की दुकानें खुलने लग गईं।

इसकी वजह एएमयू में पढ़ने वाले वो हजारों छात्र-छात्राएं थे, जो यहीं से स्टेशनरी लेने आते थे। अब एएमयू में 30 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं हैं, जिन्हें शमशाद मार्केट से हर तरह पुस्तकें मिल जाती हैं।

संवेदनशील भी है बाजार

शहर के संवेदनशील इलाकों की सूची में शमशाद मार्केट भी शामिल है। यहां कई बार उपद्रव हो चुके हैं। आंदोलनों का गवाह भी बना है यह मार्केट। चाहे सीएए, एनआरसी का विरोध हो या फिर एएमयू में हुआ कोई घटनाक्रम, हर बार यही बाजार झुलसता है।

लेकिन, इन सब दुश्वारियों को झेलने के बाद भी बाजार अपनी जगह कायम है। कोई व्यापारी यहां से दुकान छोड़कर नहीं गया। वर्षों पुरानी दुकानें आज भी चहक रही हैं। मेयर मोहम्मद फुरकान, एसएसपी का आवास भी इसी मार्केट में है। पुलिस की निगरानी यहां 24 घंटे रहती है।

इनका कहना है

यह सही है कि यूनिवर्सिटी बनने के बाद से शमशाद मार्केट का विकास होता गया। पहले यहां इतनी दुकानें नहीं थी। आज यह मार्केट पुस्तकों का हब बन चुका है। मैं भी यहां 30 साल से दुकान चला रहा हूं।

संजीव अग्रवाल, दुकानदार

शमशाद मार्केट काफी चर्चित बाजार है। एएमयू से पढ़कर निकला कोई विद्यार्थी इस बाजार को नहीं भूल सकता। इस बाजार से उसकी यादें जुड़ी हुई होंगी। कोई छात्र ऐसा नहीं होगा, जिसने यहां चुंगी पर चाय न पी हो।

बेहतर बाजार है शमशाद मार्केट। पुस्तकों के लिए तो प्रसिद्ध है ही, अब तो यहां हर सामान उपलब्ध है। शोरूम खुल चुके हैं। फर्नीचर का काम भी यहां होता है। वर्षों पुरानी सिलाई की दुकानें आज भी चल रही हैं।

अब्दुल कयूम, दुकानदार

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