Jerusalem flag march
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Jerusalem flag march फ़्लैग मार्च के दौरान इस्राईली समाज में फैली फूट आई सामने

Jerusalem flag march : बैतुल मुक़द्दस में हुए फ़्लैग मार्च दौरान अवैध ज़ायोनी शासन के बीच आपसी मतभेद सामने दिखे, इस फ़्लैग मार्च से इस्राईली समाज में फैली फूट की पोल खुल गई।

ज़ायोनी कालोनी वासियों ने मंगलवार को बैतुल मुक़द्दस में रैली निकाली थी। नेफताली बेनेत के नए मंत्रीमण्डल ने इस रैली के आयोजन की अनुमति दी थी।

इस बात को अनेदखा करते हुए कि इस रैली ने फ़िलिस्तीनियों और ज़ायोनियों के बीच तनाव को बढ़ा दिया, फ्लैग मार्च ने इस्राईली समाज के भीतरी मतभेदों और ख़ामियों को भी ज़ाहिर किया।

रैली में लिकुड पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस्राईल के नए प्रधानमंत्री का विरोध करते हुए नफताली बेनेत मुर्दाबाद और बेनेत ग़द्दार है के नारे लगाए। यह बातें इस्राईली समाज में फैले गहरे मतभेद को ज़ाहिर करती हैं। इसी रैली ने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में फ़िलिस्तीनियों तथा ज़ायोनियों के बीच पाई जाने वाली नफ़रत को भी दिखाया।

कट्टरपंथी ज़ायोनियों ने Jerusalem flag march फ़्लैग मार्च के दौरान पूर्वी बैतुल मुक़द्दस के पूर्वी द्वार “बाबुल आमून” पर पहुंचकर अरब मुर्दाबाद के नारे लगाए।

फ़्लैग मार्च ने इसी तरह इस्राईल के जातिवाद को भी स्पष्ट कर दिया।

इस रैली का प्रस्ताव यहूदा हज़ानी नामक कट्टरपंथी ज़ायोनी ने दिया था जो बैतुल मुक़द्दस और जार्डन नदी के पश्चिमी तट पर यहूदी कालोनियों के निर्माण का पक्षधर था।

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यहूदा हज़ानी Gush Emunim नामक आन्दोलन का संस्थापक है। वह अमरीका में सक्रिय था। कुछ धार्मिक ज़ायोनी जनरलों के सहयोग से वह इस्राईल की सेना के लिए ज़ायोनी युवाओं की भर्ती किया करता था।

1992 में यहूदा हज़ानी की मौत के बाद फ्लैग मार्च को उसकी सलाना याद मनाने के लिए निकाला जाने लगा जिसमें कट्टरवादी ज़ायोनी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

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