Pork in Corona Vaccine
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Pork in Corona Vaccine कोरोना वैक्सीन में सूअर के मांस के प्रयोग की वजह से धार्मिक समुदाय हुए चिंतित

ब्यूरो: Pork in Corona Vaccine कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनिया भर में पहले बनाने की होड़ लगी हुई थी. दुनियाभर के सभी देश टीके को लेकर काफी कोशिशों में लगे हुए थे. वहीँ अब एक नई चिंता आन पड़ी है.

कुछ धार्मिक समुदाय को वैक्सीन में सूअर के मांस के प्रयोग पर चिंता जाहिर की है. सूअर के मांस यानी पोर्क से बने उत्पाद और उनका प्रयोग कुछ धार्मिक समुदायों में प्रतिबंधित है जैसे कि मुस्लिम समुदाय.

मुंबई में कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अपने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे चीनी वैक्सीन का प्रयोग बिल्कुल न करें.

मुंबई में 9 मुस्लिम संस्थाओं की एक मीटिंग हुई जिसमें चीन में बनी वैक्सीन का प्रयोग न करने का फैसला किया गया. इन मुस्लिम संस्थाओं का कहना है कि चीन की वैक्सीन में पोर्क का प्रयोग किया गया है और मुस्लिम के लिए सूअर मांस का प्रयोग वर्जित है.

इसलिए उन्होंने अपने समुदाय से अपील की है कि वे चीन की वैक्सीन का प्रयोग न करें.

रज़ा अकादमी के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सैयद नूरी कहते हैं, “मुंबई में आज हमारे लोगों के लिए एक मीटिंग की गयी जिसमें नौ संस्थाओं ने भाग लिया. हमें पता चला है कि चीन में एक वैक्सीन बनी है जिसमें पोर्क उत्पाद जैसे सूअर का बाल, चर्बी और मांस का प्रयोग किया गया है.

मुस्लिम के लिए पोर्क हराम है. इतना कि यदि एक कुएं में सूअर का बाल गिर जाए तो पूरा कुआं नापाक हो जाता है. इसलिए यह फैसला लिया गया है कि हम चीन की वैक्सीन का प्रयोग नहीं करेंगे.”

मुस्लिम समुदाय में टीके के इस्तेमाल को लेकर छिड़ी बहस

पूरे विश्व में यह अफवाहें जोरों पर हैं कि कोरोना वायरस की वैक्सीन (Pork in Corona Vaccine) बनाने में सूअर के मांस का प्रयोग किया गया है. इसके बाद मुस्लिम समुदाय में इस टीके के प्रयोग को लेकर बहस छिड़ी हुई है.

फिर भी कुछ मुस्लिम विद्वानों का कहना है कि यदि किसी का जीवन बचाना हो तब हराम करार दी गयी वस्तुओं का प्रयोग करने की अनुमति क़ुरान में दी गयी है.

उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम विद्वान मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने अपने समुदाय के लोगों को बजाय किसी अफवाह का हिस्सा बनने के, इस टीके के प्रयोग की सलाह दी है.

वैक्सीन के भंडारण और परिवहन के दौरान उसे सुरक्षित और प्रभावी बनाये रखने के लिए पोर्क से निकाले गए जिलेटिन का प्रयोग व्यापक रूप से स्टेबलाइजर के तौर पर किया जाता है.

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